पैसों का महत्व कितना है

एक शाम को कुछ दिन पहले कुछ दोस्त कॉलेज से पास आउट होने वाले दोस्तों ने मिलकर अपने सबसे फेवरेट प्रोफेसर से मिलने के लिए उनके घर गए 1 साल पहले कॉलेज से पास आउट हो के वे सभी आज नौकरी कर रहे हैं प्रोफ़ेसर के साथ बात करते करते सबने मिलकर प्रोफेसर को बताया कि कॉलेज के बाद जिंदगी कितनी हार्ड और कंप्लीटेड बन गई है उन लोगों ने कहा कि कैसे उन्हें हर रोज 8 - 9 घंटे काम करना पड़ता है और ऊपर से बॉस का गुस्सा ऑफिस की पॉलिटेक्निक और कंपनी टेशन साथ ही सभी ने एक चीज के बारे में बात करते करते हैं दो है पैसा पैसा और बस पैसा
उन लोगों की कंप्लेंट ध्यान से सुनने के बाद प्रोफेसर ने उन लोगों से कहा-- तुम लोग जरा बैठो मैं तुम्हारे लिए जरा चाय बना कर लाता हूं फिर वह उन सभी छह दोस्तों के लिए 6 कप चाय बनाकर ले आए लेकिन उनमें से तीन कप प्लास्टिक के डिस्पोजल कप थे और बाकी के तीन कब बहुत ही सुंदर लग्जरी कब थे
 प्रोफेसर ने उन लोगों से कहा- जरा उठ के अपनी-अपनी चाय ले लेना बस कुछ सेकेंड के अंदर ही लड़ाई शुरू पहला दोस्त बोला भाई यह कब तू मेरे लिए है फिर दूसरे ने कहा गाड़ी मैंने ड्राइव करके यहां तक लेकर आया हूं किसी भी तीसरा दोस्त भी बोल पड़ा अच्छा सबसे पहले रूम में एंट्री मैंने की है इसलिए इस कप में चाय तो मैं ही पी लूंगा ऐसे हंसते हंसते हुए बच्चों की तरह एक दूसरे से लड़ने में लग गए प्रोसेसर उन दोस्तों के बीच में शाम कंपटीशन बिल्कुल साफ देख पा रहे थे फिर जब फाइनली लड़ाई खत्म हुआ और सब चाय लेकर अपनी अपनी जगह पर बैठे तो प्रोफ़ेसर ने उन सभी दोस्तों की तरफ देखते हुए एक स्माइल पास की और कहा-- यही प्रॉब्लम है तुम सब लोग लड़ रहे थे कि अच्छी वाली कप में चाय किसे मिलेगी और किसी नहीं जबकि तब कोई नहीं खाने वाला पिएंगे तो चाय ही जो कि हर कप में एक समान ही है
बिल्कुल ऐसी ही हमारी जिंदगी की मैन मकसद है खुश रहना और उसके लिए हमें थोड़ा बहुत पैसों की जरूरत है लेकिन कभी-कभी असली मकसद को ही मार कर हम बेवकूफ हो की तरह पैसो के पीछे भागते रहते हैं क्योंकि इस समाज में ज्यादातर लोग ही इंसान को जज करते हैं उसके पास कितना पैसा है और वह क्या जॉब करते हैं यह देख कर
मतलब चाय नहीं बल्कि उस चाय की कब देखकर जहां पर असली बात तो यह है कि अगर चाय बढ़िया हो तो उसे मिट्टी के कप में भी पिया जा सकता है लेकिन चाय ही अगर घटिया हो और उसमें ढेर सारा नमक मिला हो तो उसको लाखों रुपए की कब में भी इंजॉय नहीं किया जा सकता लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हमारी जिंदगी में पैसों की कोई वैल्यू नहीं बिल्कुल है हम पर कितनी है यह समझने में हम गलती करते हैं
Time; knowledge; happiness; wealth; money हमारी जिंदगी की जरूरत है जैसे ही पैसा हमारी wealth है पर जिंदगी में हम पैसा इकट्ठा करते हैं और उस पैसों से किताब खरीदत हैं ताकि हम उस किताब से knowledge ले सकें हम अपनों के साथ time बिता ते हैं ताकि हमें happiness मिल सके ऐसे तो ही हम एंटर चेंज करते रहते हैं
जब हम पैसा देकर महंगा मोबाइल खरीदते हैं तब हम सिर्फ उस मोबाइल को ही नहीं बल्कि उसके साथ इस्तेमाल करने वाले experience ;social ;status जो भी इस फोन के साथ जुड़ा हुआ है वह सब खरीदते हैं लेकिन प्रॉब्लम तभी होती है जब हम यह भूल जाते हैं कि कौन सी हमारी need है और कौन सी हमारी luxury है एक बात कही जाती है
The things you own end up owning चाहे जितना चीज खरीद ले चाहे जितना मर्जी पैसा कमा ले यह जो हमारी आदत है और चाहिए और चाहिए यह कभी भी हमारा पीछा नहीं छोड़ती मतलब एक साइकिल की तरह गोल गोल घूमती रहती है अपने ऊपर स्ट्रेस लेकर हम पैसा कमाते हैं और फिर उस पैसे को खर्च करते हैं स्ट्रेस भगाने के लिए याद तो हम मूवी देखते हैं या तो कहीं दूर खून लेते हैं हम ऐसे जिंदगी की साइकिल में जो लोग फंस जाते हैं उन लोगों की जिंदगी में सिर्फ एक ही मकसद बन जाता है जो कि है पैसा कमाना जो उन्हें पैसों का गुलाम बना देता है जिससे वह पैसे को नहीं बल्कि पैसा उन्हें खर्च करने लगता है

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